कख हर्ची होला
रिती रिवाज पुरण
अब नि दिखेंदा पाण्डों का उ पवाडा
संगीत...............१२३
कख हर्ची होला रिती रिवाज पुरण
अब नि सुणेदां पाण्डों का उ पवाडा
कख हर्ची होला रिती रिवाज पुरण
अब नि सुणेदां पाण्डों का उ पवाडा
हरची मा मन क्या त
मेरा दगड्यूं कु साथ
तैरिक तैरिक बगुति अब व्हे मनख्यूं की डैर
संगीत...............१२३
हरची मा मन क्या त मेरा दगड्यूं कु साथ
तैरिक तैरिक बगुति अब व्हे मनख्यूं की डैर
हरची उ
हरची उ गांजी भी जाली उर्खयालू कुटणु
हरची उ बेटी ब्वार्यूं कु लटग्याणी उठ्णु
कख हर्ची होला रिती रिवाज पुरण
अब नि सुणेदां पाण्डों का उ पवाडा
हरची मा फडक्याली
दुंदक्याली दै कु स्वाद
हिसर किन्गोड़ बेडू तिमलू की रेगे याद
संगीत...............१२३
हरची मा फडक्याली दुंदक्याली दै कु स्वाद
हिसर किन्गोड़ बेडू तिमलू की रेगे याद
हरची उ
हरची उ छिलका भेला बग्वाल्यूं की रस्याँण
हरची उ कोदू कंडाली झांगोर की घाण
कख हर्ची होला रिती रिवाज पुरण
अब नि सुणेदां पाण्डों का उ पवाडा
हरची उ लाणु खाणु मिठु
बोलुण बच्याणु
हरची डिंन्ड्याली दिवार हरची नाज कुठार
संगीत...............१२३
हरची उ लाणु खाणु मिठु बोलुण बच्याणु
हरची डिंन्ड्याली दिवार हरची नाज कुठार
अब त
अब त हाँ रूप्या रूप्या कन होयु मुंडारु
अब त ते मट्ठा बदल झट पौणा च दारु
कख हर्ची होला रिती रिवाज पुरण
अब नि सुणेदां पाण्डों का उ पवाडा
कख हर्ची होला रिती रिवाज पुरण
अब नि सुणेदां पाण्डों का उ पवाडा
कख हर्ची होला रिती रिवाज पुरण
अब नि सुणेदां पाण्डों का उ पवाडा
कख हर्ची होला रिती रिवाज पुरण
अब नि सुणेदां पाण्डों का उ पवाडा
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अब नि दिखेंदा पाण्डों का उ पवाडा
संगीत...............१२३
कख हर्ची होला रिती रिवाज पुरण
अब नि सुणेदां पाण्डों का उ पवाडा
कख हर्ची होला रिती रिवाज पुरण
अब नि सुणेदां पाण्डों का उ पवाडा
तैरिक तैरिक बगुति अब व्हे मनख्यूं की डैर
संगीत...............१२३
हरची मा मन क्या त मेरा दगड्यूं कु साथ
तैरिक तैरिक बगुति अब व्हे मनख्यूं की डैर
हरची उ
हरची उ गांजी भी जाली उर्खयालू कुटणु
हरची उ बेटी ब्वार्यूं कु लटग्याणी उठ्णु
कख हर्ची होला रिती रिवाज पुरण
अब नि सुणेदां पाण्डों का उ पवाडा
हिसर किन्गोड़ बेडू तिमलू की रेगे याद
संगीत...............१२३
हरची मा फडक्याली दुंदक्याली दै कु स्वाद
हिसर किन्गोड़ बेडू तिमलू की रेगे याद
हरची उ
हरची उ छिलका भेला बग्वाल्यूं की रस्याँण
हरची उ कोदू कंडाली झांगोर की घाण
कख हर्ची होला रिती रिवाज पुरण
अब नि सुणेदां पाण्डों का उ पवाडा
हरची डिंन्ड्याली दिवार हरची नाज कुठार
संगीत...............१२३
हरची उ लाणु खाणु मिठु बोलुण बच्याणु
हरची डिंन्ड्याली दिवार हरची नाज कुठार
अब त
अब त हाँ रूप्या रूप्या कन होयु मुंडारु
अब त ते मट्ठा बदल झट पौणा च दारु
कख हर्ची होला रिती रिवाज पुरण
अब नि सुणेदां पाण्डों का उ पवाडा
कख हर्ची होला रिती रिवाज पुरण
अब नि सुणेदां पाण्डों का उ पवाडा
कख हर्ची होला रिती रिवाज पुरण
अब नि सुणेदां पाण्डों का उ पवाडा
कख हर्ची होला रिती रिवाज पुरण
अब नि सुणेदां पाण्डों का उ पवाडा
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