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Tuesday, April 2, 2024

ब्यखुनी कू घाम अछ्ले भी नि च रात घना घोर व्हे गे फे र II अनुराधा पौडवाल II

संगीत.............१२३
ब्यखुनी कू घाम अछ्ले भी नि च
रात घना घोर व्हे गे फे र
बथों मा द्द्यु बल्यूं च तेल नि रयूं च
आंदी के नि औंदी दों सूबे र
ब्यखुनी कू घाम अछ्ले भी नि च
 
संगीत.............१२३
केकु घेंट होली झूटा सुपिन्यों की माला
संगीत.............१२३
केकु घेंट होली झूटा सुपिन्यों की माला
केकु करी आस बिराणी बिराणी 
केकु करी आस बिराणी
रात भी नी खुली छे कि टूटी ग्ये वो सुपिन्या
मन मा ही रे ग्येनी गाणी
ब्याखुनी कू घाम अछ्ले भी नि च
 
संगीत.............१२३
इनु पोड़ी बजर खरैयाँ सरु गों कू
संगीत.............१२३
इनु पड़ी बजर खरैयाँ सरु गों कू
निरभागी व्हेग्यों मि भग्यान भग्यान 
निरभागी व्हे ग्यों मि भग्यान 
देंवी की लगाईं आग कन क्वे बुझाण
मेमा त आंसू भी नि रयां न
ब्याखुनी कू घाम अछ्ले भी नि च
राती घना घोर व्हे गे फे र
बथों मा द्द्यु बल्यूं च तेल नि रयूं च
औंदी के नि औंदी दों सूबे र
औंदी के नि औंदी दों सूबे र
औंदी के नि औंदी दों सूबे र


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तेरी रतन्याली आन्ख्यूं की भोंर्यूं मा मेरा मुलके की रीत बसीं च जनी तेरी स्वाणी गल्वाड्यूं की चोंठी मा सांच्यो पुरणी वो प्रीत सजीं च जनी

संगीत...........................१२३ तेरी रतन्याली आन्ख्यूं की भोंर्यूं मा  तेरी रतन्याली आन्ख्यूं की भोंर्यूं मा  मेरा मुलके की रीत बसीं च...